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कैसे पीजीडीएम बदल सकता है आपकी जिंदगी ?

पीजीडीएम प्रबंधन में दो साल का डिप्लोमा कोर्स है। इन दिनों यह इतना लोकप्रिय होने का कारण यह है कि पाठ्यक्रम के डिज़ाइन के लिए प्रबंधन छात्रों के बीच योग्यता के बाद यह एक नई और अधिक मांग है। पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषताओं में से एक यह है कि अंतिम पाठ्यक्रम का निर्णय संस्थान द्वारा ही किया जाता है, इसलिए जब आप जिस संस्थान में जाते हैं, उसके आधार पर आपको उस प्रकार की शिक्षा मिलती है जो आप चाहते हैं। इसका एक और लाभ यह है कि पाठ्यक्रम एक एमबीए की तुलना में बहुत अधिक नियमित रूप से अपडेट हो जाता है, जो नवीनतम बाजार मानकों के साथ रखना आसान बनाता है।

लेकिन सबसे बड़ा लाभ यह है कि जहां एमबीए के छात्र अभी भी सैद्धांतिक शिक्षा पर भरोसा करते हैं, वहीं पीजीडीएम छात्रों को अधिक हैंड-ऑन दृष्टिकोण का लाभ मिलता है, जहां वे सीख सकते हैं कि विभिन्न परियोजनाओं और इंटर्नशिप के लिए वास्तविक जीवन के बाजार की स्थितियों में अपने सबक का उपयोग कैसे करें। इससे उन्हें कॉर्पोरेट वातावरण और उसमें जीवित रहने के लिए आवश्यक नरम कौशल के बारे में जानने में आसानी होती है।

PGDM के छात्रों ने यह सब पूरा कर लिया है, नौकरी के माहौल में प्लेसमेंट प्राप्त करना बहुत आसान है जहां अधिक से अधिक एमबीए स्नातकों को बेरोजगार माना जा रहा है।

पीजीडीएम का पूरा नाम Post Graduate Diploma in Management  है. यह भारत मे कई संस्थानों द्वारा पेश किए जाने वाले दो साल का फुल टाइम मैनेजमेंट कोर्स है. इस कोर्स को विभिन्न संस्थानों और उनके  पाठ्यक्रम के आधार पर 4 या 6 Semester में विभाजित किया जा सकता है. जो संस्थान भारत मे PGDM कोर्स चला रहे है वो भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत AICTE द्वारा स्वीकृत है.

PGDM कोर्स संरचना और PGDM के विषय लगभग MBA के समान होते है. इनके बीच एकमात्र अंतर यह है कि MBA एक Degree प्रदान करता है जबकि PGDM एक Post Graduate Diploma है. PGDM Programs किसी भी University से संबद्ध नही हो सकते है. इसलिए इसे Degree Course के रूप मे नही माना जाना चाहिए.

PGDM के लिए शैक्षिक योग्यता

PGDM में दाखिला लेने के लिए छात्र किसी भी धारा से बारहवीं के साथ-साथ तीन साल की स्नातक डिग्री प्राप्त होना चाहिए और स्नातक में कम से कम 50% Marks प्राप्त होने चाहिए SC/ST के लिए 45% Marks होने आवश्यक है.

PGDM कितने समय का होता है

PGDM कोर्स में आम तौर पर 2 साल में 4 Semester होते हैं और कभी-कभी 6 Semester भी होते हैं. PGDM कोर्स की खास बात यह है कि इसका पाठ्यक्रम हर 4-5 साल में बदल जाता है क्योंकि यह उद्योग आधारित उन्नत पाठ्यक्रम है. इसमें अतिथि व्याख्यान, सेमिनार, पैनल चर्चा, कार्यशाला आदि भी होते रहते हैं जिससे विद्यार्थियों का संपूर्ण विकास हो सके.

PGDM में विषय 

भारत के सभी संस्थानों मे पीजीडीएम मे कुछ सबसे आम विषयों की एक सूची निम्नलिखित है इनके नाम आप नीचे देख सकते है.

  1.  वित्त
  2. विपणन
  3. लेखांकन
  4. मानव संसाधन
  5. सूचान प्रौद्योगिकी
  6. संचालन प्रबंधन
  7. आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन

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Written by Sachin Tomar

A versatile, creative, experienced, and curious writer with a dedication to creates interesting and unique contents. More than 5 years of experience in the education sector.

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