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    भारत में उभरते करियर विकल्प?

    करियर एक ऐसी चीज है जो हर इंसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

    जबकि दुनिया रोती है और कंपनियों के डाउन होने की खबरें सुर्खियां बनती हैं, लेकिन ऐसी भारतीय विकास की कहानी है कि सूर्योदय के क्षेत्रों में विस्तार के अलावा, पूरी तरह से नए अवसर जो कभी अस्तित्व में नहीं थे, वे भी नौकरी चाहने वालों के लिए खुलेंगे।

    मेरे अनुसार ये भारत में अब 5 सबसे तेजी से बढ़ते करियर हैं। 

    यदि आप अनिश्चित हैं कि कौन सा करियर चुनना है या करियर स्विच करना चाहते हैं, तो अपने करियर से वह कदम उठाएं जो भारत में तेजी से बढ़ रहा है और उभर रहा है।

    यहाँ मैं आपको भारतीय बाजार में अधिकतम विकास क्षमता के साथ नौकरियों के बारे में बता रहा हूँ:

    1. विश्लेषिकी पेशेवर (Analytics professional)

    एनालिटिक्स एक ऐसा पेशा है जो विभिन्न उद्योगों, स्वास्थ्य सेवा और बैंकिंग से लेकर ई-कॉमर्स और मार्केटिंग से लेकर सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी तक फैला हुआ है। इसमें एक व्यापारिक रणनीति का विश्लेषण करना और संगठनात्मक संरचना को तैयार करना या व्यवस्थित करना शामिल है। यदि आप इस पेशे को आगे बढ़ाने की योजना बनाते हैं, तो व्यवसाय या वित्त में स्नातक या मास्टर डिग्री आवश्यक है।

    वार्षिक वेतन: 1.80 लाख से 9.80 लाख(यह अनुभव और कौशल पर भी निर्भर करता है)

    2. इंटीरियर डिजाइनर(Interior designer)

    एक नए घर को निर्माण और डिजाइनिंग की आवश्यकता होती है, और ये दोनों कार्य पुराने दिनों में ठेकेदारों द्वारा पूरा किए जाते थे। लेकिन परिदृश्य बदल रहा है, क्योंकि लोग अपने घरों में सुंदरता का एक स्पर्श जोड़ने के लिए इंटीरियर डिजाइनरों को नियुक्त कर रहे हैं और दिए गए स्थान का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं। आप एक एजेंसी के तहत काम कर सकते हैं, अपनी खुद की फर्म खोल सकते हैं या बस एक फ्रीलांस इंटीरियर डिजाइनर के रूप में काम कर सकते हैं; यह काफी लचीला है।

    वार्षिक वेतन (बहुत भिन्न होता है): 100,000 से 6 लाख तक(यह अनुभव और कौशल पर भी निर्भर करता है)

    3. आर एंड डी पेशेवर (R&D professional)

    भारत में अनुसंधान और विकास एक प्रगतिशील क्षेत्र है। आरएंडडी पेशेवर इंजीनियरिंग तकनीशियन हैं जो अपने ज्ञान का उपयोग इंजीनियरों और अन्य वैज्ञानिकों की सहायता के लिए नए उत्पादों या उपकरणों को बनाने, डिजाइन करने और निर्माण करने के लिए करते हैं जो तब विपणन और उपभोक्ताओं या विशिष्ट उद्योगों को बेचे जाएंगे। आर एंड डी पेशेवर उत्पादों पर प्रयोगों के परीक्षण और संचालन के लिए भी जिम्मेदार हैं; डेटा और रिकॉर्डिंग परिणामों को एक साथ लाना, और यदि उत्पाद चालू है या यह लाभदायक होगा, तो स्पॉट करने के लिए।

    वार्षिक वेतन: 3 लाख से 30 लाख तक(यह अनुभव और कौशल पर भी निर्भर करता है)

    4. इवेंट मैनेजर( Event manager)

    भारत देश भर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों, बैठकों और सम्मेलनों की मेजबानी के लिए एक वैश्विक क्षेत्र बन गया है। यदि आप संचार, आतिथ्य या सार्वजनिक संबंधों में डिग्री का पीछा करने वालों में से एक हैं, तो यह आपके लिए जगह है। उपमहाद्वीप नई इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों के उद्योग में प्रवेश करने और नौकरियों के अवसर पैदा करने के लिए बहुत ही संक्षिप्त है।

    वार्षिक वेतन: 1.35 लाख से 8.17 लाख तक(यह अनुभव और कौशल पर भी निर्भर करता है)

    5. हेल्थकेयर और मेडिसिन(Healthcare and medicine)

    संभवतः एकमात्र ऐसा पेशा है जो कभी भी मांग से दूर जाने वाला नहीं है, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र एक और डोमेन है जहां से आप नौकरी के अवसरों की उम्मीद कर सकते हैं। जहाँ एक छोर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जल्द ही निदान में उतरने की उम्मीद है, वहाँ उसी के तहत कई अन्य उभरते विकल्प हैं। फिटनेस की वर्तमान लहर और अच्छी तरह से लोगों के ऊपर ले जाने के साथ, पोषण और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में विकास की उम्मीद कर सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग कॉस्मेटिक उपचार के लिए अधिक आत्म-जागरूक और खुले होते हैं, त्वचा विशेषज्ञों को भविष्य में उच्च ट्रैफिक का अनुभव होने की उम्मीद है।

     

    वार्षिक वेतन: 3 लाख से 12 लाख तक(यह अनुभव और कौशल पर भी निर्भर करता है)

    6.मार्केटिंग और कंटेंट क्रिएशन (Marketing and Content Creation)

    2013 में ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं ने काम के भविष्य पर एक अध्ययन किया था जिसमें कहा गया था कि अभी उपलब्ध हर 2 में से 1 जॉब में मशीन द्वारा स्वचालित होने का जोखिम है। जबकि मशीनें उच्च मात्रा और आवृत्ति की नौकरियों में मनुष्यों से आगे निकलने की क्षमता रखती हैं, जब वे रचनात्मकता और उपन्यास कार्यों की तुलना में हमारे मुकाबले कहीं अधिक हीन हैं। चूंकि मार्केटिंग और कंटेंट क्रिएशन क्रिएटिविटी के पहियों पर चलता है, इसलिए इनसे इस तरह के खतरों से इम्यून रहने की उम्मीद की जाती है और इस तरह आगे भी इनके पनपने की उम्मीद है।

    वार्षिक वेतन: 2.5 लाख से 08 लाख तक(यह अनुभव और कौशल पर भी निर्भर करता है)

    7. व्यापार विश्लेषक( Business Analysts)

    सूचना और डेटा पूजा के इस मौजूदा युग में, कंपनियों के पास डेटा के पूल हैं। जब तक कुछ प्रासंगिक कटौती करने के लिए एक साथ नहीं रखा जाता है लेकिन यह डेटा कोई महत्व नहीं रखता है। और यह वह जगह है जहां व्यापार विश्लेषकों को जानकारी के इस ढेर से समझ बनाने की आवश्यकता होगी। इसके अलावा, व्यापार की दुनिया में लगातार बढ़ती जनसांख्यिकी के साथ, इस प्रोफ़ाइल में काफी कुछ उम्र के लिए रहने की उम्मीद है।

    वार्षिक वेतन: 4 लाख से 15 लाख तक(यह अनुभव और कौशल पर भी निर्भर करता है)

    8. फैशन उद्योग (Fashion industry)

    महानगरीय दुनिया में फैशन के मौजूदा प्रचलन के साथ, लोग इस क्षेत्र में अधिक से अधिक हो रहे हैं। एक पहले से ही दुनिया भर में और अधिक फैशन डिजाइनिंग और टेक्सटाइल इंजीनियरिंग संस्थान खोल सकता है। सोशल मीडिया के उदय, ब्रांड मार्केटिंग और अच्छी तरह से और फिटनेस क्षेत्र ने इस बाजार को और अधिक बढ़ावा दिया है। साथ ही, फैशन में निवेश करने की लोगों की बढ़ती क्षमता और पसंद इस क्षेत्र को और भी अधिक सक्षम बनाती है।

    वार्षिक वेतन: 3 लाख से 7 लाख तक(यह अनुभव और कौशल पर भी निर्भर करता है)

    9.कभी-कर्मचारी-कभी-उद्यमी (Quasi-employee Quasi- entrepreneur)

    ई-कॉमर्स के वर्तमान उछाल के साथ, बाजार ने नौकरियों के क्वैसी-कर्मचारी क्वासी उद्यमी प्रकृति के लिए खोल दिया है। उदाहरण के लिए: अपने स्वयं के कर्मचारियों के अलावा, फ्लिपकार्ट का पारिस्थितिकी तंत्र उन सभी निर्माताओं का उपभोग करता है जो फ्लिपकार्ट के प्लेटफॉर्म पर अपना माल बेच रहे हैं। जबकि उनकी नौकरी का एक हिस्सा उद्यमी प्रकृति का है, जहां वे कच्चा माल खरीदते हैं और सामान बनाते हैं, दूसरे में एक पारंपरिक नौकरी की प्रकृति है। इसी तरह, डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे प्रेक्टो, ओला, उबर आदि उसी कार्य संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं। और ये चार्ट के शीर्ष पर होने के साथ, इस नौकरी की प्रकृति को समय की आवश्यकता के रूप में पहचानना गलत नहीं होगा।

    वार्षिक वेतन: 3 लाख से 10 लाख तक (यह अनुभव और कौशल पर भी निर्भर करता है)

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    What Should You Prefer To Do Business: PGDM or MBA?

    Many students have confusion in their mind on PGDM course and it’s a comparison with MBA. PGDM means Post Graduate Diploma in Management, the main confusion starts when you see the term Diploma. Many students have a common perception that it is a Diploma course and not a Degree; And to a extend they are right it is a Diploma. The main reason behind why postgraduate courses are named as PGDM is that when an Institute is an autonomous body (meaning it is not affiliated to any University) and conducts management courses then such Institutes cannot offer MBA degree. Even institutes SP JAIN, IIMs, XLRI’s doesn’t offer MBA degrees they only give PGP Diploma or PGDM since they are autonomous and independent bodies.

    PGDM was declared equivalent to MBA by the Association of Indian Universities (AIU) on 3rd April 2008. This MBA equivalence has been renewed by the AIU from time to time continuously since 2008.

    The best B-school in Varanasi, the school of management science(SMS), brings you the Post Graduate Diploma in Management (PGDM). The program is a 2-year, full-time programme isAICET approved and is comparable to those offered by some of the best business schools in the country.

    Since its foundation in the year 1995 to the day it achieved the coveted ‘A’ grade in NAAC accreditation, School of Management Sciences, Varanasi has been relentlessly pursuing the ruthless path of growth and excellence which resulted in the growing recognition and respect for this institution in the realms of industry and academia alike.

    The two years full-time Post Graduate Programme comprises of four semesters. The first two terms focus on Foundation and Application aspects of management and the last two terms focus on Specialization and Integration with global developments in different areas of management.

    School of Management Sciences, Varanasi emphasizes ensuring a holistic personality development of its students. Our preference for the growth in all aspects is evident in our approach which led to the development and establishment of various Centres of Excellence aimed at nourishing spirituality, entrepreneurship, innovation and research as well as various Clubs dedicated to providing a sound platform for sports, arts, and culture.

    SMS have been quite frequent in receiving appreciation and recognition from various institutions and professional bodies of significance for the substantial difference we have brought to various academic dimensions of management education. Being declared the Best B-School in India (North) for our ‘outstanding contribution in the field of education, training, and development’ by ASSOCHAM India at the onset of March’ 2018 establishes the integrity of our efforts. Moreover, the prestigious Business India group has rated School of Management Sciences, Varanasi amongst the Top-50 B-Schools in India repeatedly with recently placing it at 31st position in the latest B-School survey (‘Business India’ 2017 issue). It is our privilege to have become the first B-School in this part of the country to have such an honor.

    School of Management Sciences, Varanasi realizes and recognizes the responsibility that comes in with such corporeal accolades. We reiterate and rejuvenate our commitment to excellence at every opportunity, whether huge or dwarf, of making a sustainable difference in the ecosystem of management education.

    There are a few reasons why you need to consider a PGDM program :

    A PGDM Course gives you entrepreneurial and business skills: Growing entrepreneurship trend helps students and make them keep to develop their career in entrepreneurship. These personal Development skills set would encourage students to open their own firms after completion of PGDM course.

    Specialization: The best part of the PGDM course offers several specialized courses and electives. Some of PGDM programs include Project Management, Logistics and Supply Chain Management, Media Management and extends the range of MBA programs.

    Interaction and training sessions with industries: During PGDM courses various opportunities will be given to start internships with industries and help in filling the gap between industry and academics and gives exposure to students.

    Career options after PGDM

    One can have an exciting career opportunity after PGDM in big multinational companies.

    And, PGDM courses that are well recognized by the industry can give you higher-level jobs.

    Students can expect decent starting pay packages an average being 6-8 lacs / Annum.

    By earning a PGDM degree from reputed PGDM institution like the school of management science(SMS) Varanasi individuals can broaden their educational horizons and also hope to get the leadership positions.

    PGDM not only helps prepare professionals in areas with a large requirement at the national level but also at international level.

    PGDM have various subjects such as accounting, economics, finance, operations management, marketing, organizational behavior and project management and many more.

    More ever SMS has opened their admissions for their PGDM COURSES with a vision of global learning hub. SMS’s PGDM is also known for its ‘Case-Based Learning’ and ‘Skill Based Curriculum’.

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    भारत में शीर्ष 10 जनसंचार (Mass-Communication) कॉलेज

     मास मीडिया सीधे जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए यह देश के सबसे प्रभावशाली और बहुमुखी उद्योगों में से एक के रूप में आता है। यह होने के नाते, इस क्षेत्र में पेशेवरों का काम जिम्मेदारियों से भरा है। उद्योग ने शुरुआत में समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के साथ आम जनता को जोड़ने के लिए एक साधन के रूप में शुरुआत की। हालांकि, आज मीडिया की परिभाषा टीवी, रेडियो, इंटरनेट और पसंद जैसे उप-विषयों की एक सरणी को शामिल करने के लिए व्यापक हो गई है।

    जन संचार में पेशेवर, किसी भी राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ताकि जनता तक उनकी असीम पहुंच हो। मीडिया का लोगों के जीवन पर प्रबल प्रभाव उन संभावित कारणों में से एक है जो युवाओं को इस उद्योग में अपना करियर बनाने के लिए आकर्षित करता है।

    इस क्षेत्र में कैरियर बनाने की इच्छा रखने वालों के लिए भारत में शीर्ष 10 मास-कम्युनिकेशन कॉलेजों की सूची दी गई है     

    1.सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन, पुणे
    
    पता: सिम्बायोसिस नॉलेज विलेज, ग्राम लावले, मूली तालुका, पुणे, महाराष्ट्र 412115
    फोन: 020 2663 4513
    वेबसाइट: simc.edu
    2.लेडी श्री राम कॉलेज फॉर विमेन, दिल्ली
    
    पता: लाला लाजपत राय रोड, लाजपत नगर पार्ट 4, नई दिल्ली, दिल्ली 110024
    फोन: 011 4549 4949
    वेबसाइट: www.lsr.edu.in
    
    3.क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बैंगलोर
    
    पता: होसुर मेन Rd, बैंगलोर, कर्नाटक 560029
    फोन: 080 4012 9100
    वेबसाइट: www.christuniversity.in
    
    
    4.मणिपाल संचार संस्थान, मणिपाल
    
    पता: स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन, प्रेस कॉर्नर, मणिपाल 576 104 (कर्नाटक)
    फोन: + 91-0820-2571901 / 03
    वेबसाइट: www.manipal.edu/mic
    
    5.एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन, नोएडा
    
    पता: सेक्टर 125, नोएडा, उत्तर प्रदेश 201303
    फोन: 0120 471 3600
    वेबसाइट: www.amity.edu/asco

     

    6.दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, नई दिल्ली
    
    पता: शहीद सुधीर सुभरवाल मार्ग, नेताजी नगर, नई दिल्ली, दिल्ली 110023
    फोन: 011 2410 9821
    वेबसाइट: dcac.du.ac.in
    
    7.स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट साइंसेज, वाराणसी 
    
    पता: खुशीपुर, प .ो -बचाओं , वाराणसी -221011,उत्तर प्रदेश (इंडिया )
    फोन: 7052055555
    वेबसाइट:smsvaranasi.com
    
    8.इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर विमेन, नई दिल्ली
    
    पता: 31, शाम नाथ मार्ग, इंद्रप्रस्थ कॉलेज, सिविल लाइंस, नई दिल्ली, दिल्ली 110054
    फोन: 011 2396 2009
    वेबसाइट: ipcollege.ac.in
    
    9.कमला नेहरू कॉलेज फॉर विमेन, दिल्ली
    
    पता: सिरी फोर्ट आरडी, नई दिल्ली, डीएल 110049
    फोन: 011 2649 4881
    वेबसाइट: www.knc.edu.in
    
    10.मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, चेन्नई
    पता: वेलाचेरी Rd, तांबरम पूर्व, चेन्नई, तमिलनाडु 600059
    फोन: 044 2239 7731
    वेबसाइट: www.mcc.edu.in
     

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    नरेंद्र मोदी भारत में छात्रों में अवसाद (डिप्रेशन) को लेकर चिंतित क्यों हैं?

    विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों के आंकड़े और 2016 के एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि छात्रों में अवसाद के बारे में पीएम नरेंद्र मोदी की चिंता काफी हद तक जायज है

    इस वर्ष मार्च में अपने रेडियो संबोधन “मन की बात” में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लोगों से अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने का आग्रह किया।

    मोदी ने कहा, “पहला मंत्र अवसाद के इलाज की ओर है।”

    उन्होंने यह भी कहा कि हॉस्टल में रहने वाले छात्र अकेलेपन के कारण विशेष रूप से अवसाद की चपेट में हैं।


    विभिन्न स्वास्थ्य एजेंसियों के आंकड़े और भारतीय युवाओं के बीच 2016 के सीएसडीएस-लोकनीति सर्वेक्षण (15-34 वर्ष) बताते हैं कि मोदी की चिंता काफी हद तक सही है। भारत में छात्रों में अवसाद और संबंधित समस्याएं व्यापक हैं। उनमें से अधिकांश या तो अनिच्छुक हैं या इसके लिए चिकित्सा सहायता लेने में असमर्थ हैं। अवसाद से पीड़ित लोगों को अस्वास्थ्यकर आदतों जैसे तंबाकू और शराब का सेवन करने की संभावना है।

    कई अध्ययनों के डेटा बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या एक गंभीर मुद्दा है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो-साइंसेज (NIMHANS) द्वारा आयोजित नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे 2015-16 में 18 और उससे अधिक उम्र वालों में 10.6% की मानसिक रुग्णता की रिपोर्ट की गई। युवाओं (18 – 29 वर्ष) के बीच यह दर थोड़ी कम, 7.5% थी।

    2017 में जारी एक विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश में 56 मिलियन से अधिक व्यक्ति वर्तमान में अवसादग्रस्तता विकारों का सामना करते हैं।

    एशियन जर्नल ऑफ साइकेट्री में हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में 700 से अधिक बेतरतीब ढंग से चुने गए छात्रों के एक सर्वेक्षण के आधार पर पाया गया कि उनमें से लगभग आधे (53%) अवसाद के मध्यम या गंभीर रूप से पीड़ित थे।

    2016 के लोकनीति-सीएसडीएस युवा सर्वेक्षण के निष्कर्षों से पता चलता है कि पिछले 10 वर्षों के दौरान 10 में से चार युवा, जो वर्तमान में नियमित या कभी-कभी अवसाद / तनाव महसूस कर रहे हैं। अकेलापन एक कारण हो सकता है क्योंकि सर्वेक्षण में 30% भी कई बार अकेलापन महसूस होने की पुष्टि करता है। यह नोट करना दुखद है कि लगभग 6% छात्रों ने पुष्टि की कि उन्हें पिछले कुछ वर्षों में कम से कम एक बार आत्महत्या करने जैसा महसूस हुआ। पूर्ण शब्दों में, ये बड़ी संख्या में अशांत होने की संभावना है।

    अध्ययन की खोज इस मिथक को दूर करने में भी मदद करती है कि अवसाद और अकेलेपन जैसी समस्याएं केवल एक शहरी घटना है। यह समस्या ग्रामीण और शहरी युवाओं के बीच समान रूप से प्रचलित है। हमारे सर्वेक्षण के अनुसार इस मुद्दे पर शायद ही कोई लिंग अंतर है। मनोचिकित्सा पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन, हालांकि महिलाओं के बीच अधिक से अधिक घटनाओं का प्रदर्शन किया था।

    मानसिक कल्याण समस्याओं से जुड़े सामाजिक कलंक के कारण, कई लोग इन समस्याओं को स्वीकार नहीं करते हैं। इस प्रकार, रिपोर्ट किए गए निष्कर्षों में एक अंडर-रिपोर्टिंग पूर्वाग्रह हो सकता है। यह चिकित्सकीय सहायता लेने को भी हतोत्साहित करता है।

    अवसाद और अकेलेपन का इलाज चिकित्सकीय रूप से करने के बजाय, कई छात्र ’राहत’ पाने की उम्मीद में शराब और तंबाकू के सेवन जैसी अस्वास्थ्यकर आदतों की ओर बढ़ रहे हैं। अध्ययन इंगित करता है कि ये आदतें उन लोगों में अपेक्षाकृत अधिक हैं जो मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों का सामना करते हैं। मानसिक समस्याओं की गंभीरता के साथ अंतर बढ़ता है।

    10% से कम छात्रों को, जिन्होंने उदास या अकीलापान महसूस किया था,  डॉक्टर से परामर्श लिया था। आत्महत्या की प्रवृत्ति रखने वालों में एक चौथाई से भी कम लोग कभी मदद के लिए मनोवैज्ञानिक या काउंसलर के पास गए थे। अपेक्षित रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आंकड़े बदतर पाए जाते हैं। ये बेहद कम आंकड़े सामाजिक कलंक जैसे कई कारकों के कारण होते हैं जैसे परामर्शदाता के पास जाना या मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों का इलाज करना, जागरूकता की कमी और आवश्यक बुनियादी ढाँचे की कमी।

    अंतिम मैं यह एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय है क्योंकि यहां तक ​​कि जो लोग डॉक्टर से परामर्श करना चाहते हैं, वे इस तरह की सुविधाओं का उपयोग नहीं कर सकते हैं। भारत में ऐसे रोगियों से निपटने के लिए डॉक्टरों और क्लीनिकों की गंभीर कमी है। दोनों डॉक्टरों के इस्तीफे के कारण भोपाल के एम्स में मानसिक स्वास्थ्य रोगियों के लिए पूरे रोगी विभाग की सुविधाओं को बंद करना मानसिक स्वास्थ्य के संबंध में मामलों की स्थिति का एक छोटा सा उदाहरण है।

    एक NIMHANS अध्ययन ने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की भारी कमी का भी खुलासा किया है। NIMHANS की रिपोर्ट के अनुसार, देश में मानसिक स्वास्थ्य के लिए केवल 4,000 प्रशिक्षित डॉक्टर हैं। वे बड़े पैमाने पर शहरी क्षेत्रों में हैं। एक उम्मीद है कि मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में प्रधानमंत्री मोदी की चिंता इस समस्या को दूर करने की दिशा में एक शुरुआत प्रदान कर सकती है।

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    MBA v / s PGDM: आपको क्या चुनना चाहिए?

    अधिकांश लोग, प्रबंधन क्षेत्र में एक या दो साल का अनुभव प्राप्त करने के बाद, एमबीए या पीजीडीएम पाठ्यक्रम को आगे बढ़ाने के बारे में सोचते हैं, ताकि अपनी साख और नौकरी की संभावनाओं को और बेहतर बना सकें। जबकि कई लोग सोचते हैं कि दोनों के बीच अंतर है, कुछ भी दोनों को एक ही डिग्री के रूप में मानते हैं, नाम में केवल एक अंतर है। किसी व्यक्ति के लिए यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि दोनों एक-दूसरे से कैसे भिन्न हैं और उनकी प्रासंगिकता क्या है।

    इन दोनों पाठ्यक्रमों को पूरा करने से उनके करियर के विकास में मदद मिलती है, एक बेहतर स्थिति प्राप्त करने और एक बड़ा वेतन प्राप्त करने में।

    उनका क्या मतलब है?

    एमबीए: मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन  

    PGDM:  पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट

    क्यों वे बहुत मांग में हैं?

    एमबीए: एक मास्टर इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों द्वारा प्रदान किया जाने वाला एक डिग्री कोर्स है। इसलिए, केवल विश्वविद्यालय एमबीए प्रोग्राम की पेशकश कर सकते हैं।

    पीजीडीएम: एक पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (पीजीडीएम) उन संस्थानों द्वारा प्रदान किया जाने वाला डिप्लोमा कोर्स है जो अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) द्वारा मान्यता प्राप्त है और जो स्वायत्त हैं और किसी विश्वविद्यालय से संबद्ध नहीं हैं। हालांकि, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) द्वारा मान्यता एक संस्थान के पीजीडीएम पाठ्यक्रम को एमबीए के समकक्ष बनाती है।  

     शुल्क

    एमबीए की तुलना में पीजीडीएम की फीस अधिक है। एमबीए संस्थान कम शुल्क लेते हैं क्योंकि यह विश्वविद्यालय के मानक के समान है।

    क्या एमबीए और पीजीडीएम समान हैं?

    यह अनिवार्य नहीं है कि एक पीजीडीएम एमबीए के बराबर है क्योंकि तब पीजीडीएम कोर्स की पेशकश करने वाले कॉलेज को एआईयू (द एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज) से मान्यता प्राप्त होनी चाहिए।

    पाठ्यक्रम के बीच अंतर?

     हालांकि दोनों के पाठ्यक्रम में समानताएं हैं, मतभेद भी मौजूद हैं। एमबीए का पीछा करने वाला एक छात्र प्रबंधन के सैद्धांतिक पहलुओं का अधिक अध्ययन करेगा। एक एमबीए संस्थान एक निश्चित पाठ्यक्रम का पालन करेगा क्योंकि यह विश्वविद्यालय के दिशानिर्देशों पर आधारित होगा। पीजीडीएम कोर्स करने वाला छात्र सॉफ्ट स्किल के निर्माण के बारे में ज्ञान प्राप्त कर रहा होगा और यह कार्यक्रम अधिक उद्योग उन्मुख है। एक स्वायत्त संस्थान को विश्वविद्यालय के मानकों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए यह उद्योग के मानकों के अनुसार अपने पाठ्यक्रम को बदलने और व्यावसायिक वातावरण में बदलाव के लिए स्वतंत्र है। पाठ्यक्रम आपको एक कंपनी में वरिष्ठ स्तर की स्थिति के लिए तैयार करेगा।

    भारत में प्रसिद्ध एमबीए संस्थान:

    फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

    एसआईबीएम (सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट), पुणे

    एनएमआईएमएस (नारसी मोनजी इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमैंट स्ट्डीज़), मुम्बई

    IIFT (भारतीय विदेश व्यापार संस्थान)

    जेबीआईएमएस (जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज), मुंबई

    IMNU (प्रबंधन संस्थान, निरमा विश्वविद्यालय)

    भारत में प्रसिद्ध PGDM संस्थान:

    IIM (भारतीय प्रबंधन संस्थान)

    एक्सएलआरआई (जेवियर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट),

    जमशेदपुर एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, मुंबई

    NMIMS (बंगलौर / हैदराबाद)

    School of Management Sciences(SMS) वाराणसी

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    BEST TIPS FOR DEALING WITH DEPRESSION IN COLLEGE

    Depression has become one of the most serious and important issues for college students across countries. College students may be prone to depression due to a lot of factors such as the stress of school work, or of the university one of the major possibly factor can be the feeling of isolation after moving away from friends and family. students who move away from their hometown to study face a lot of problems and are seen more depressed and anxious as it gets hard for the students to adjust to a completely new environment and people.

    College students should be aware of how they can differentiate depression from occasionally feeling sad, being sad does not mean you are depressed depression is a serious but now a common and treatable medical illness. No student or adult should suffer in silence, we all know how society puts a strain on people who suffer from any mental illness but regardless of that a person has the right to get the proper help that is needed this is their fundamental right.

    Symptoms of depression can basically include a depressed mood (feeling sad, empty, or hopeless),lack of interest or pleasure in activities that you used to enjoy at one point, sudden gain or loss of weight, difficulty in sleeping or insomnia, low energy, feeling worthless, feeling guilty, difficulty concentrating, difficulty making decisions, feeling irritable, feeling restless, or feeling suicidal.

    We can say that the symptoms of depression can also cause major difficulties in the day to day activities of a person. Traditionally, when people think of trying to manage depression they think engaging in therapy or taking medication will be the best solution of their problems but this may also vary from the type of depression a person might be suffering from. While medication and therapy are helpful they are often recommended to people who suffer from clinical depression.

    List of things that we recommend to people who are struggling from depression:

    Engage in Psychotherapy

    No one should deal with depression alone on in isolation from the world. There are a lot of trained and licensed mental health professionals who can provide you with ample support and help you to find relief and get back to normal again. Psychotherapy may help you to identify with all the issues that are contributing to your symptoms of depression and the best way to address these issues.

    There are many things to consider when it comes to choosing a therapist, research has shown that
    the relationship between the therapist and client is the center to positive changes in therapy and in
    the client,s life. If you have tried therapy before and it didn’t be of any help to you, don’t assume that it can’t ever be helpful, maybe your therapist was not right for you.

    Many college campuses have started to provide an on-campus counseling center’s for students to get help at the campus. Therapists on college campuses are often hired on their ability to connect with and support college students and do the best they can for them. If your depression is impacting your ability to focus on studies you can request special accommodations from the college. We encourage students to begin their search for a therapist with their campus counseling centers.

    Explore Medication Options

    If you have been experiencing symptoms of depression it is always a good idea to talk to your primary caretaker. You can seek the help of nurse practitioners, a doctor, or psychiatrists all of these can prescribe a medication to you. Sometimes psychotherapy may not be enough for more severe forms of depression and therefore the doctor may decide that medication is also needed. With advances in medicine, medications that can be effective in treating depression and helping a person to get back to their normal lifestyle.

    Practice Mindfulness Exercises

    Mindfulness may be defined as staying aware of the present moment and living the present moment to the fullest. While it may sound simple but being mindful is not simple at all it takes a great deal of time and practice to develop the ability to get in touch with one’s own conscious.

    There is still hope as there are many ways to go about learning the art of mindfulness these can be
    seen as meeting with a therapist who encourages you to be mindful, going to a yoga class and
    meeting with new people who practice mindfulness, reading about different mindfulness exercises
    and practicing them, listening to audio mindfulness meditations. Reports show meditation is a
    mindfulness practice that has been helpful to people in managing depression.

    Spend Time in Nature

    This may look like a very simple idea but spending time in nature has scientifically shown to reduce
    the symptoms of depression. A philosophical approach that shows that spending time in nature
    actually reduces depression is called ecotherapy, also known as green therapy, or nature therapy.

    Even a 30-minute walk in a green setting has clearly shown its impact of the symptoms of depression of a person. The reasons behind many colleges have been located in beautiful settings with a lot of greenery is because they want to provide a good atmosphere for the students

    Exercise

    Exercise no doubt has countless physical health benefits such can be seen as strengthening the heart rate, lowering blood pressure, reducing body fat, and improving strength. Exercise has also been seen as providing numerous mental health benefits which may include reducing stress, anxiety, and depression. Research has proven that exercise does treats mild to moderate depression. Most colleges and universities offer campus to provide students with gyms stocked with stationary bikes and swimming pools. Most colleges and universities also offer exercise classes and encourage their students to take part in extracurricular sports activities.

    A student can start by simply walking to class rather than taking the bus or driving this will make
    them more active. When you exercise you produce endorphin which leads to increased feelings of
    well-being.

    Strengthen your Social Connections

    Going to college outside your hometown means moving away from friends and family and starting a new life, as it puts a lot of time and energy into meeting new people and developing friendships with new people. Stress can be a major symptom of depression it is important to know that social connection does reduce the impact of stress. “Depression thrives in conditions of social isolation and loneliness”. Breaking the isolation and reaching out to others for support is a powerful way in which one can fight depression.

    Improve your Nutrition

    Everyone knows that when you eat a balanced diet you live a balanced life. However, it may get
    difficult for students who are in college to eat nutritious food. The simple act of trying to add more
    healthy nutrient-rich foods into your diet cancels out some of the other less helpful foods.

    Simple snacks that won’t require any preparation, and travel easily are saviors like fruits or nuts or dried seeds.

    In some cases nutritional deficiencies can contribute to symptoms of depression, so checking with
    your doctor to see if you should add any vitamins to your diet is always a good idea.

    Avoid Drug and Alcohol Use

    Drinking in college or even underage drinking has become very normal in our generations mind. It is important for college students to understand the potential negative health impacts of drug and
    alcohol use and the severe impact that this will have on their life later on.

    Alcohol and depression often go hand in hand. Nowadays students who are depressed do rely on a
    lot of drugs and alcohol to make them feel sane, recently many colleges have started to notice a
    a behavioral pattern in these and have taken up steps to reduce drug and alcohol abuse in college
    students.

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    Stress Management Tips for Students

    What is Stress?

    Stress can be characterized as our enthusiastic, subjective, physical, and conduct response to any apparent requests or dangers additionally called stressors.

    Having some pressure is important. Some pressure, some dimension of excitement, is expected to spur us to act, go up against difficulties, and comply with time constraints.

    In any case, encountering excessively pressure that is, as a rule excessively excited consistently for a long duration and being like this over numerous days can end up dangerous. This experience is frequently known as being worried.

    Understudies are a standout amongst the most well-known casualties of stress. Factors, for example, money related costs, overcommitment, family desires, due dates and the outstanding task at hand all incite worry in understudies. While a mellow measure of pressure is exceptionally valuable and goes about as an inspiration for understudies, an excessive amount of pressure can meddle with their day by day lives.

    At the point when worked after some time, stress can offer ascent to a large group of major issues, for example, misery and anxiety. Overseeing worry in its beginning times can help boost the school/college experience and open doors for understudies.

    There are three sorts of regular pressure triggers understudies involvement:

    Public Activity.

    Social pressure puts genuine companion weight on understudies. Managing new connections, offsetting scholarly existence with public activity, living with or without relatives, changing in accordance with the new condition, all reason worry among understudies.

    Academic Pressure.

    Strict timetables, due dates, low evaluations, testing classes, tests, obligations, and poor time the executives all lead to scholarly pressure.

    Day by day life.

    This pressure is related to issues that are not identified with scholastic or public activity. These can incorporate day today day schedule, low maintenance work, money related weights, and any close to the home issue.

    Down to earth pressure, the board can enable understudies to manage their stresses and turn out to be increasingly profitable, able and effective.

    Here are a couple of tips for overseeing pressure

    Oversee time.

    Regardless of whether it’s unwinding, work or study, time must be spent admirably. Understudies must most likely structure and adhere to a timetable. Pick a loosening up break among work and study, regardless of whether it’s simply requiring out investment to relax.

    Exercise and get some air

    A sound way of life is basic for understudies, particularly at the college level. Rather than celebrating around evening time and being cooped up at home concentrate for the duration of the day, set aside out opportunity to get some air and exercise. Stress is by and large lower in individuals who keep up a solid daily schedule.

    Remain positive

    On the off chance that you continue concentrating on the negative parts of a circumstance, you will be loaded by mental pressure. Rather, endeavor to take a gander at the glass half full, and remain hopeful through intense occasions. For instance, rather than feeling annoyed with a terrible evaluation, endeavor to keep up an uplifting disposition and see approaches to enhance whenever.

    Sort out your scholarly life

    The association is essential in scholarly life for managing pressure. By keeping scholarly notes sorted out, turning in assignments on time, and monitoring all due dates, stress can be decreased all things considered.

    Quit hesitating

    The most ideal approach to quit hesitating is to get the most troublesome errands off the beaten path first. A great many people linger in light of the fact that they fear the undertaking they’re putting off. Dispose of the feared deed, and you’re ready.

    Approach slowly and carefully

    Try not to put such a large number of eggs in a single bin. Rather than feeling overpowered pretty much every one of the due dates, it’s best to make a rundown and sort them out one by one. This encourages you to be increasingly proficient and gainful with your time.

    Invest energy with companions

    Have some coffee time with family or friends express yourself will help you to release anxiety. Stress can likewise deteriorate if an individual feels desolate. By letting out the entirety of your considerations to somebody you trust, you quickly feel much better.

    “A positive attitude may not solve all our problems but that is the only option we have if we want to get out of problems”.

     

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    Digital Marketing is The Future and We Cannot Deny This Fact.

     

    The world has already gone digital and if we don’t keep our pace constant with the developments, we are definitely a loss. When everything in business transforming into digital, so are the promotions and marketing strategies. So it’s very important to learn effective web organizing traffic controlling techniques which include digital marketing. Smartphone plays a vital role in website traffic. In fact, India is booming in the Digital marketing sector and providing more and more opportunities for the youth for a prosperous.

    Today we can not deny the fact that internet marketing is dominating the world. In a short span of time digital marketing has outclassed the conventional marketing technique in various ways. The significant success has even forced the governments of countries to go digital way. Today companies are adopting new digital tools for marketing and promotions activities. after the jio revolution Internet users are growing day by day and 80% of them use web through their smartphones which means connecting to customers is easy and highly possible over conventional type of marketing. As a result, several or most companies use digital platforms to promote their business. Digital Marketing is thus offering more employment opportunities to youth but the fact is poor internet or verbal knowledge will not help you make an expert digital marketer. You would need to polish your skills and yourself.

    According to the International Journal of Advanced Research Foundation 2016.

    Between 1971 to 1972, The ARPANET is used to arrange a sale between students at the Stanford Artificial Intelligence Laboratory and the Massachusetts Institute of Technology, the earliest example of electronics or digital commerce.

    1979: Michael Aldrich demonstrates the first online shopping system.

    1981: Thomson Holidays UK is the first business-to-business online shopping system to be installed.

    1996: India MART B2B marketplace established in India.

    2007: Flipkart was established in India. Every E-marketing or commercial enterprises use majorly digital means for their marketing purposes.

    In 2011, the digital marketing data revealed that advertising through the mobile phone and tablets was 200% lower than that of the following years. During this year, the net worth was $2 billion. The growth was in a geometric sequence as its increase to $6 billion in 2012. The competitive growth demands for more improvement in the career works and professionals are being added to the field.

    From 2013 to March 2015, the total investment increase was 1.5 billion dollars over the preceding years. There has been an impressive growth up till this present moment.

    The report by the International Journal of Advanced Research Foundation revealed that India is getting to see the golden period of the Internet sector between 2013 to 2018 with incredible growth opportunities and secular growth adoption for E-Commerce, Internet Advertising, Social Media, Search, Online Content, and Services relating digital marketing.

    Reasons to Join the Digital Marketing Course

    According to the latest survey of the Associated Chambers of Commerce and Industry of India (Assocham), digital marketing business will grow 20-25% annually without any financial crisis.

    The digital payments market In India is expected to grow to the US $1 trillion by 2023 led by growth in mobile payments, presenting huge business opportunities for players in the digital space. Mobile payments are projected to rise from $10 billion in 2017-18 to $190 billion by 2023.

    other factors mentioned below:

    1. Huge Industry Demand

    2. Future of Indian IT Service

    3. Opportunity for better pay and a higher position

    4. you can not ignore digital media in your marketing strategy.

    5. You can start own business independently

     

     

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    कैसे पीजीडीएम बदल सकता है आपकी जिंदगी ?

    पीजीडीएम प्रबंधन में दो साल का डिप्लोमा कोर्स है। इन दिनों यह इतना लोकप्रिय होने का कारण यह है कि पाठ्यक्रम के डिज़ाइन के लिए प्रबंधन छात्रों के बीच योग्यता के बाद यह एक नई और अधिक मांग है। पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषताओं में से एक यह है कि अंतिम पाठ्यक्रम का निर्णय संस्थान द्वारा ही किया जाता है, इसलिए जब आप जिस संस्थान में जाते हैं, उसके आधार पर आपको उस प्रकार की शिक्षा मिलती है जो आप चाहते हैं। इसका एक और लाभ यह है कि पाठ्यक्रम एक एमबीए की तुलना में बहुत अधिक नियमित रूप से अपडेट हो जाता है, जो नवीनतम बाजार मानकों के साथ रखना आसान बनाता है।

    लेकिन सबसे बड़ा लाभ यह है कि जहां एमबीए के छात्र अभी भी सैद्धांतिक शिक्षा पर भरोसा करते हैं, वहीं पीजीडीएम छात्रों को अधिक हैंड-ऑन दृष्टिकोण का लाभ मिलता है, जहां वे सीख सकते हैं कि विभिन्न परियोजनाओं और इंटर्नशिप के लिए वास्तविक जीवन के बाजार की स्थितियों में अपने सबक का उपयोग कैसे करें। इससे उन्हें कॉर्पोरेट वातावरण और उसमें जीवित रहने के लिए आवश्यक नरम कौशल के बारे में जानने में आसानी होती है।

    PGDM के छात्रों ने यह सब पूरा कर लिया है, नौकरी के माहौल में प्लेसमेंट प्राप्त करना बहुत आसान है जहां अधिक से अधिक एमबीए स्नातकों को बेरोजगार माना जा रहा है।

    पीजीडीएम का पूरा नाम Post Graduate Diploma in Management  है. यह भारत मे कई संस्थानों द्वारा पेश किए जाने वाले दो साल का फुल टाइम मैनेजमेंट कोर्स है. इस कोर्स को विभिन्न संस्थानों और उनके  पाठ्यक्रम के आधार पर 4 या 6 Semester में विभाजित किया जा सकता है. जो संस्थान भारत मे PGDM कोर्स चला रहे है वो भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत AICTE द्वारा स्वीकृत है.

    PGDM कोर्स संरचना और PGDM के विषय लगभग MBA के समान होते है. इनके बीच एकमात्र अंतर यह है कि MBA एक Degree प्रदान करता है जबकि PGDM एक Post Graduate Diploma है. PGDM Programs किसी भी University से संबद्ध नही हो सकते है. इसलिए इसे Degree Course के रूप मे नही माना जाना चाहिए.

    PGDM के लिए शैक्षिक योग्यता

    PGDM में दाखिला लेने के लिए छात्र किसी भी धारा से बारहवीं के साथ-साथ तीन साल की स्नातक डिग्री प्राप्त होना चाहिए और स्नातक में कम से कम 50% Marks प्राप्त होने चाहिए SC/ST के लिए 45% Marks होने आवश्यक है.

    PGDM कितने समय का होता है

    PGDM कोर्स में आम तौर पर 2 साल में 4 Semester होते हैं और कभी-कभी 6 Semester भी होते हैं. PGDM कोर्स की खास बात यह है कि इसका पाठ्यक्रम हर 4-5 साल में बदल जाता है क्योंकि यह उद्योग आधारित उन्नत पाठ्यक्रम है. इसमें अतिथि व्याख्यान, सेमिनार, पैनल चर्चा, कार्यशाला आदि भी होते रहते हैं जिससे विद्यार्थियों का संपूर्ण विकास हो सके.

    PGDM में विषय 

    भारत के सभी संस्थानों मे पीजीडीएम मे कुछ सबसे आम विषयों की एक सूची निम्नलिखित है इनके नाम आप नीचे देख सकते है.

    1.  वित्त
    2. विपणन
    3. लेखांकन
    4. मानव संसाधन
    5. सूचान प्रौद्योगिकी
    6. संचालन प्रबंधन
    7. आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन

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    Helpful

    ROLE OF YOGA IN STRESS MANAGEMENT

    Yoga has long been known to be a great remedy for stress. Yoga combines many popular stress-reducing techniques, including exercise and learning to control the breath, clear the mind, and relax the body. As yoga becomes more popular, more and more people are discovering the benefits this ancient practice brings to their stressful lives. Creating a consistent yoga routine is the best way to experience the difference yoga can make in your life. These five asanas stress management yoga routine is intended for beginners who think they don’t have time for yoga.

    Exercise

    Hatha yoga is a part of yoga. Haṭha is a Sanskrit word which literally means “force” and thus implies a system of physical techniques. There are many different types of hatha yoga: some are slow and more focused on stretching, others are fast and similar to a workout. If you are looking to relieve stress, then no yoga style is superior, so pick one that meets your level of physical fitness and personality. Any exercise will help you to relieve stress by keeping the body healthy and release natural hormones that make you feel much better. Yoga also relieves stress through stretching. When you are stressed, then the tension is stored in your body and the body you feel lethargicness and often causing pain. The regular stretching through yoga releases tension from problem areas, including the hips and shoulders.

    Pranayama

    pranayama, or breath exercise, is an integral part of any yoga practice and this breathing exercise will release new energy in your body that will transform your daily life by improving your stamina and immunity. Just learning to take deep breaths and realizing that this can be a quick way to combat stressful situations is amazingly effective.

    Clearing the Mind

    Our mind is regularly active, racing from one thought to another, spinning possible scenarios for the future, dwelling on incidents from the past. All this mind work is tiring and stressful. Yoga offers several techniques for controlling the curious mind. One is breath work(pranayama), as outlined above. Each breath is tied completely to the present moment; you are not breathing in the past or the future, but only right now. Focusing on each inhale and exhale to keep out other thoughts is one way to clear the mind, It is also a basic meditation technique. In addition, the performance of yoga asanas also acts as a form of meditation. The asanas are so physical and have to be done with such concentration, that all other thoughts and worries are put to the side, giving your brain a much-needed break.

    Relaxation

    Each yoga sessions ends with five to ten minutes spent relaxing in savasana. Initially this asanas can be a little bit difficult at first, eventually, it serves the purpose of a total release for both body and mind. Savasana brings you back into the world. you will feel refreshed and equip you with the tools to fight stress in your daily life. Yoga Nidra is among the deepest possible states of relaxation while still maintaining full consciousness, which can also be a great stress reliever.

    When we perform work in devotion, it purifies the mind and deepens our spiritual realization. Then when the mind becomes peaceful, meditation becomes the primary means of elevation. Through meditation, a person strives to conquer their mind, for while the untrained mind is the worst enemy, the trained mind is the best friend.

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