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एसएमएस वाराणसी के जनसंचार विभाग द्वारा राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय रचनात्मक लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता

एसएमएस वाराणसी के जनसंचार विभाग द्वारा राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय रचनात्मक लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता सह विशेष व्याख्यान का शुभारंभ विचार, अभिव्यक्ति और सृजन के साथ हुआ।कार्यक्रम के प्रथम दिन मुख्य अतिथि प्रो. अमिताभ पाण्डेय, एमबीए पाठ्यक्रम समन्वयक, का स्वागत जनसंचार पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. ईशान त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि हिंदी महज़ एक भाषा भर नहीं, बल्कि सभी के बरतने के लिए संस्कार है। उन्होंने काशी और हिंदी के आत्मीय संबंध को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों को हिंदी के सही और प्रभावी प्रयोग के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि प्रो. अमिताभ पाण्डेय ने हिंदी मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डिजिटल दौर में हिंदी मीडिया की मांग लगातार बनी हुई है और उसका विस्तार हो रहा है।

इस अवसर पर असिस्टेंट प्रोफ़ेसर डॉ. गौरव शाह ने हिंदी के शुद्ध प्रयोग पर बल दिया, जबकि डॉ. अंशुमान राणा, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर ने वैश्विक स्तर पर हिंदी की बढ़ती स्वीकार्यता को रेखांकित किया। डॉ. चंद्रशेखर सिंह, समन्वयक, बीकॉम पाठ्यक्रम ने विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य पढ़ने और पुस्तकालय के अधिकाधिक उपयोग के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का सफ़ल संचालन सुश्री अर्चना कुमारी, बीए (ऑनर्स) मास कम्युनिकेशन - पञ्चम सेमेस्टर ने किया।
कार्यक्रम के प्रथम दिन आयोजित रचनात्मक लेखन प्रतियोगिता में जनसंचार के विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता, लेखन-कौशल और अभिव्यक्ति की क्षमता का परिचय दिया।

कार्यक्रम का अगला पड़ाव 14 सितंबर, हिंदी दिवस को होगा, जब वरिष्ठ पत्रकार डॉ. दयानंद विशेष व्याख्यान देंगे।

“हिंदी का मीडिया संसार : परम्परा, परिवर्तन और संभावनाएं” विषय पर होने वाला यह सत्र हिंदी और मीडिया के बदलते रिश्तों को समझने का अवसर होगा। इसी अवसर पर रचनात्मक लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

क्योंकि भाषा तभी जीवंत रहती है, जब नई पीढ़ी उसे सिर्फ़ बोलती नहीं - उसमें सोचती, लिखती और सवाल करती है।

राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर एसएमएस वाराणसी के जनसंचार विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय रचनात्मक लेखन एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता का समापन विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ हुआ। दो दिनों तक चले इस आयोजन में हिंदी को किताबों और पाठ्यक्रम से आगे ले जाकर लेखन, संवाद, पत्रकारिता और अभिव्यक्ति के जीवंत माध्यम के रूप में समझने का प्रयास किया गया।

समापन सत्र में वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार डॉ. दयानंद जी, जो प्रतिष्ठित आज अखबार से लगभग पाँच दशकों से जुड़े रहे हैं, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने बदलते मीडिया और उसकी भाषा के साथ स्वयं को निरंतर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका दिया “शब्द मित्र” का विचार खास तौर पर उल्लेखनीय रहा - हर महीने कम से कम पाँच नए हिंदी शब्द खोजिए, उन्हें डायरी में दर्ज कीजिए और वाक्यों में प्रयोग कीजिए। इस छोटी-सी आदत से वर्ष भर में 60 से अधिक नए शब्द आपकी अपनी शब्द-संपदा का हिस्सा बन सकते हैं।

जनसंचार पाठ्यक्रम के समन्वयक डॉ. ईशान त्रिपाठी ने काशी के शब्द-सृजन की परंपरा का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को भाषागत शैली विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी मीडिया में प्रभावी बने रहने के लिए भाषा पर पकड़ उतनी ही जरूरी है, जितनी पत्रकारिता की समझ। इस अवसर पर वाणिज्य विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. राजकुमार सिंह ने भी विद्यार्थियों को हिंदी के सही प्रयोग व मीडिया क्षेत्र में हो रहे बदलावों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
समापन दिवस पर “हिंदी: कागज से स्क्रीन तक” विषय पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने तर्क, वाक्-कौशल और विचारों से मंच को जीवंत कर दिया।
प्रतियोगिता के परिणामरचनात्मक लेखन आयुषी कुमारी — तृतीय सेमेस्टर तन्मय दूबे — प्रथम सेमेस्टर अर्चना कुमारी — पंचम सेमेस्टर अंशिका बरनवाल — पंचम सेमेस्टर, सांत्वना पुरस्कार
वाद-विवाद प्रतियोगिता शिवांगी सिंह — प्रथम सेमेस्टर पलक सिंह — तृतीय सेमेस्टर स्नेहा शर्मा — तृतीय सेमेस्टर
कार्यक्रम में अतिथि का स्वागत डॉ. गौरव शाह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंशुमान राणा ने दिया।
शायद हिंदी को बचाने या बढ़ाने के लिए बड़े नारों से ज्यादा ज़रूरत है - कुछ अच्छे शब्दों को अपना मित्र बनाने की।
इसी विचार के साथ राष्ट्रीय हिंदी दिवस पर आयोजित यह दो दिवसीय आयोजन शब्दों से संवाद और संवाद से विचार तक की एक सार्थक यात्रा बनकर सम्पन्न हुआ


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