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एसएमएस वाराणसी ने शब्दों, ज्ञान और गरिमा के साथ मनाया हिंदी दिवस!

जनसंचार विभाग, एसएमएस वाराणसी द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर दो दिवसीय रचनात्मक लेखन सह वाद-विवाद प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक समापन हुआ।
अंतिम दिन, कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आकाशवाणी, वाराणसी के कार्यक्रम प्रमुख श्री अशोक पांडेय उपस्थित थे।  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने हिंदी की समकालीन भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की तेज-तर्रार दुनिया में केवल हिंदी भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान है। इसे लिखना, बोलना और समझना समय की मांग है। श्री पाण्डेय ने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, यह भारतीयता का हृदय है। इसे अपनाना आज हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों से सीधा संवाद स्थापित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस भाषा में सोचेंगे, वही भाषा हमारी असली अभिव्यक्ति बनेगी। इसलिए हिंदी को लिखना और बोलना दोनों समय की आवश्यकता है।


मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए, बीए (ऑनर्स) मास कम्युनिकेशन के पाठ्यक्रम समन्वयक डॉ. ईशान त्रिपाठी ने छात्रों को निडर होकर प्रतियोगिताओं में सहभागिता के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि पढ़ने की आदत से ही रचनाशीलता व शब्द भंडार विकसित हो सकते हैं और शुद्ध हिंदी लेखन ही सशक्त अभिव्यक्ति की कुंजी है। डॉ. त्रिपाठी ने विद्यार्थियों से हिन्दी को संस्कार के तौर पर अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि संस्कारों और संवेदनाओं की भाषा है। हिंदी की समृद्धि, उसके प्रयोग में है – जितना अधिक लिखेंगे और बोलेंगे, उतनी ही जीवंत होगी।


 "हिन्दी:वैश्विक परिदृश्य में संभावनाएं व चुनौतियां" विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता में छात्रों के जोशीले तर्क और नए दृष्टिकोण सामने आए।
 प्रतियोगिता के विजेता:🥇सुश्री सुरभि त्रिपाठी (पाँचवाँ सेमेस्टर) – प्रथम पुरस्कार🥈सुश्री स्नेहा सिंह (पाँचवाँ सेमेस्टर) – द्वितीय पुरस्कार🥉सुश्री अंशिका बरनवाल (तृतीय सेमेस्टर)–तृतीय पुरस्कार🎖 छह अन्य प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार मिले।


उत्साह को और बढ़ाते हुए, डॉ. त्रिपाठी ने एक आश्चर्यजनक घोषणा की – सभी 9 विजेताओं को आकाशवाणी वाराणसी में कार्यक्रम प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर भी मिलेगा!
धन्यवाद ज्ञापन डॉ. गौरव शाह ने दिया। कार्यक्रम का संचालन बी.ए. (ऑनर्स)- तृतीय सेमेस्टर की छात्रा वर्धिनी सोनी व छात्र उत्सव यादव ने किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों के साथ डॉ. अंशुमान राणा, डॉ. वीर प्रताप भी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम ने न केवल हिंदी को सम्मानित किया, बल्कि नवोदित मीडियाकर्मियों में हिंदी के प्रति आत्मविश्वास, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता का भी संचार किया।


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